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दैनिक पंचांग
स्थान-आधारित सटीक वैदिक पंचांग एवं शुभ/अशुभ मुहूर्त
New Delhi, India(UTC+05:30)
Tuesday, September 29, 2026
पंचांग (5 अंग)5 अंग
तिथि
कृष्ण तृतीया
5:11 PM तक
तत्पश्चात: चतुर्थी
नक्षत्र
अश्विनी
स्वामी: केतु
9:04 AM तक
तत्पश्चात: भरणी
योग
व्याघात
6:14 AM तक
तत्पश्चात: हर्षण
करण
वणिज
6:15 AM तक
तत्पश्चात: बव
वार
मंगलवार
स्वामी: मंगल
सूर्य एवं चंद्रमा के समय
सूर्योदय 🌅6:13 AM
सूर्यास्त 🌇6:09 PM
मध्याह्न ☀️12:11 PM
दिन की अवधि ⏳11 घंटे 56 मिनट
चंद्रोदय 🌙7:39 PM
चंद्रास्त 🌑8:44 AM
संवत एवं राशि
विक्रम संवत2083
मासआश्विन
अयनदक्षिणायन
सूर्य राशिकन्या
चंद्र राशिमेष
दैनिक वैदिक पंचांग एवं मुहूर्त परिचय
दैनिक कार्यों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा एवं ग्रहों की गति के अनुरूप करने की प्राचीन परंपरा
पंचांग के 5 अंग क्या हैं?
पंचांग शब्द संस्कृत के 'पंच' (पांच) और 'अंग' से मिलकर बना है। यह सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर काल की गणना करता है:
- तिथि: सूर्य और चंद्रमा के बीच 12° की कोणीय दूरी के आधार पर तिथि निर्धारित होती है।
- नक्षत्र: आकाशगंगा के 27 नक्षत्र मंडल, जिनसे होकर चंद्रमा यात्रा करता है।
- योग: सूर्य व चंद्रमा के देशांतर के योग से निर्मित 27 सूक्ष्म ऊर्जा काल, जो स्वास्थ्य एवं समृद्धि को प्रभावित करते हैं।
- करण: चंद्रमा की 6° की गति, जो विशिष्ट कार्यों की शुभता दर्शाती है।
- वार: सप्ताह का दिन, जो एक विशिष्ट स्वामी ग्रह द्वारा शासित होता है।
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: स्थानीय दोपहर (मध्याह्न) का लगभग 48 मिनट का सबसे श्रेष्ठ एवं मंगलकारी समय। यह समस्त दोषों का शमन कर कार्यों में सफलता प्रदान करता है।
राहु काल: छाया ग्रह राहु द्वारा शासित प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का समय। इसमें वित्तीय लेन-देन, यात्रा व मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
दिन और रात के ये समय-खंड व्यापार, यात्रा तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक होते हैं।
